N.K.KASHYAP


Commented 1 year ago
"किसी भी सभ्य समाज और इंसान ये स्वीकार नहीं कर सकता है धर्म जैसी निजी चीजों पर कोई भी राजनीती दलाली धंधा या कोई भी गंदा काम हो अगर होता है तो ये उस धर्म और समाज और इंसानो पर सवाल पैदा करता है जवाब बहुत कड़वे हो सकते है पर ये भी सच्चाई ही है आज कल के गुजरात के चुनाव में ये निजी बाते बहुत निचे उतर केर हो रही है शायद ये ही हमारी मान्यता सस्कार और धर्मो की असली हकीकत है जिसे हम अगर स्वीकार करते है तो सुधार की गुंजायस बची रहती है यदि नहीं करते है तो पदमनी की तरहे से १००० साल बाद हमारी नयी नस्ले पागलो की तरहे वाद विवाद केर रही होंगी"

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